अब मेरी बारी है दोस्ती निभाने की अब मेरी बारी है दोस्ती निभाने की
अगर बन भी जाऊं अमीर अपना जमीर नहीं बेचुगां। अगर बन भी जाऊं अमीर अपना जमीर नहीं बेचुगां।
पोखर किनारे धूप में.. पीपल की छाँव में मुझको सुकून मिलता है बस अपने गाँव में। पोखर किनारे धूप में.. पीपल की छाँव में मुझको सुकून मिलता है बस अपने गाँव में।
दुनिया छोटी, रुपए गोल बड़े हैं अनजानों में अपने सारे गौण खड़े हैं। दुनिया छोटी, रुपए गोल बड़े हैं अनजानों में अपने सारे गौण खड़े हैं।
समझना जरूरी है कीमत प्रकृति की, वक्त गुजर रहा है मुट्ठी में बंद रेत की तरह।। समझना जरूरी है कीमत प्रकृति की, वक्त गुजर रहा है मुट्ठी में बंद रेत की तरह।।